फिबोनाची श्रेणी 1, 1 से शुरू होती है, और हर अगली संख्या पिछली दो संख्याओं का योग होती है। इसका नाम लियोनार्डो ऑफ पीसा (फिबोनाची) पर पड़ा, जिन्होंने 1202 में इसका वर्णन किया; हालाँकि यह श्रेणी भारतीय गणित में सदियों पहले से ज्ञात थी। इसके अनुपात स्वर्ण अनुपात phi की ओर अभिसरित होते हैं, और जहाँ भी कुशल packing दिखाई देती है, प्रकृति में यह बार-बार उभरती है।
फिबोनाची श्रेणी 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34... को F(n) = F(n-1) + F(n-2) से परिभाषित किया जाता है। इसका नाम लियोनार्डो ऑफ पीसा के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इसे 1202 में यूरोप में लोकप्रिय बनाया; लेकिन कम-से-कम छठी शताब्दी से यह भारतीय गणित में जानी जाती थी। लगातार फिबोनाची अनुपात स्वर्ण अनुपात phi की ओर बढ़ते हैं। यह श्रेणी सूरजमुखी के बीजों की सर्पिलों, pinecone की bracts, अनानास के पैटर्न और वृक्षों की शाखाओं में दिखाई देती है। बिने का सूत्र सटीक बंद रूप देता है: F(n) = (phi^n - psi^n) / sqrt(5).